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सैलरी के हिस्से आसान भाषा में
सैलरी आमतौर पर कई हिस्सों में बँटी होती है। यह बँटवारा मायने रखता है: PF, ग्रेच्युटी, HRA की छूट और कभी-कभी ESI इसी पर टिके हैं। यहाँ हर हिस्से का मतलब और ये कैसे जुड़ते हैं, बताया गया है।
आम अर्निंग
| हिस्सा | यह क्या है |
|---|---|
| बेसिक सैलरी | सैलरी का तय मुख्य हिस्सा। PF, ग्रेच्युटी और HRA की छूट इसी पर निकलती है। |
| महँगाई भत्ता (DA) | दामों से जुड़ा एक्स्ट्रा पैसा, सरकारी नौकरी और कुछ फ़ैक्ट्रियों में आम। PF के लिए यह बेसिक में जुड़ता है। |
| मकान किराया भत्ता (HRA) | किराये में मदद। अगर कर्मचारी किराया देता है, तो पुरानी टैक्स रिजीम में इसका कुछ हिस्सा टैक्स-फ़्री हो सकता है (देखें HRA की छूट)। |
| कन्वेयंस अलाउंस | काम पर आने-जाने के लिए। आज ज़्यादातर कर्मचारियों के लिए टैक्स वाला। |
| स्पेशल अलाउंस | बचा हुआ हिस्सा जिससे तय सैलरी पूरी होती है। पूरा टैक्स वाला। |
| ओवरटाइम, इंसेंटिव, बोनस, एरियर | बदलने वाली लाइनें, जिस महीने दी जाएँ उसी में जुड़ती हैं। |
CTC, ग्रॉस और नेट
- CTC (cost to company): एम्प्लॉयर साल भर में उस व्यक्ति पर जो भी खर्च करता है: ग्रॉस सैलरी, और ऊपर से एम्प्लॉयर का PF और ESI, ग्रेच्युटी, बीमा वगैरह।
- ग्रॉस सैलरी: महीने की स्लिप पर अर्निंग का टोटल।
- नेट सैलरी (हाथ में आने वाली): ग्रॉस सैलरी में से कर्मचारी की कटौती घटाकर। यही बैंक खाते में पहुँचती है।
एक उदाहरण स्ट्रक्चर
एक दुकान एक सेल्समैन को सालाना ₹3,00,000 ग्रॉस सैलरी देती है, यानी ₹25,000 महीना।
| लाइन | हर महीने | नोट |
|---|---|---|
| बेसिक सैलरी | ₹15,000 | ग्रॉस का 60% |
| HRA | ₹6,000 | बेसिक का 40% |
| कन्वेयंस अलाउंस | ₹1,600 | तय |
| स्पेशल अलाउंस | ₹2,400 | बाकी |
| ग्रॉस | ₹25,000 |
अगर दुकान PF देती है, तो उसका अपना हिस्सा ₹15,000 का 12% = ₹1,800 महीना ऊपर से है। इसलिए सालाना CTC कम से कम ₹3,00,000 + ₹21,600 = ₹3,21,600 है।
लेबर कोड का "50% वेज" वाला नियम
नवंबर 2025 से लागू नए लेबर कोड "वेज" में बेसिक पे, DA और रिटेनिंग अलाउंस गिनते हैं। अगर बाकी भत्ते (HRA, कन्वेयंस वगैरह) कुल सैलरी के आधे से ज़्यादा हों, तो ज़्यादा वाला हिस्सा PF, ग्रेच्युटी और ऐसे फ़ायदों के लिए वेज में गिना जाता है। सीधी भाषा में: बेसिक बहुत कम और भत्ते बहुत ज़्यादा रखने से अब ये खर्चे नहीं घटते। केंद्र के नियम नोटिफ़ाई हो चुके हैं, और राज्य अभी अपने नियम ला रहे हैं, इसलिए अपने अकाउंटेंट से पूछें कि आपके बिज़नेस पर यह कैसे लागू होता है।
भत्ते और इनकम टैक्स
नई टैक्स रिजीम में, जो डिफ़ॉल्ट है, HRA और कन्वेयंस जैसे ज़्यादातर भत्तों पर सैलरी की तरह ही टैक्स लगता है। पुरानी रिजीम में HRA आंशिक रूप से छूट में हो सकता है और कुछ और भत्तों की अपनी छोटी छूटें हैं। इसीलिए टोटल एक जैसा होने पर भी स्लिप का बँटवारा कर्मचारी के लिए मायने रखता है।
टिप्स
- स्ट्रक्चर अपॉइंटमेंट लेटर में लिखें और हर महीने स्लिप एक जैसी रखें।
- हर महीने लाइनों के वही नाम रखें; मेकर का अगले पीरियड के लिए कॉपी उन्हें आपके लिए रखता है।
- पिछली बढ़ोतरी देते समय पुराने महीनों की बेसिक बदलने के बजाय "Arrears" वाली लाइन जोड़ें।